Showing posts with label धार्मिक. Show all posts
Showing posts with label धार्मिक. Show all posts

Sunday, March 16, 2014

shuklaam vardhanam vishnu


I had to prepare my son for his shloka competition, but it was so hard to find it..
Finally, I managed to find the right sanskrit lyrics, hopefully, they are correct.

शुक्लां वर्धनम् विष्णुं  शशिवर्णं चतुर्भुजं ।
प्रसन्नवदनम् ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 
in roman,

Shuklaam Vardhanam Vishnum Shashivarnam chaturbhujam
prasannavadanam dhyaayet sarvavighnopashaantaye

Hope it helps

Thursday, September 2, 2010

आरती कुंजबिहारी की... Aarti Kunj Bihari Ki...

श्री कुंजबिहारी जी की आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
लटन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की...
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

 

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की...
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…
 
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा;
बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की...
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

 

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू 
चहूँ दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद;
टेर सुन दीन भिखारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की...
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

Monday, March 24, 2008

Radika gori se.. lyrics

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे
कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

जो न ब्याह कराये,
तेरी गैया नाहि चराऊँ,
आज के बाद मेरी मैया,
तेरी दहली पर नाय आऊँ,

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

चंदन की चौकी पै
मैया तोहे बैठाऊं

अपनी राधा से में
चरण तेरे दबवाऊँ

और, भोजन में बनवाऊगो
छप्पन प्रकार के । ।

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे
कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।

छोटी सी दुल्हनिया
जब अंगना में डोलेगी

तेरे सामने मैया
वो घूंघट ना खोलेगी


दाऊ से जा कहो, जा कहो
बैठेंगे द्वार

राधिका गोरी से....

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे
कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।

सुन बातें कान्हा की,
मैया बैठी मुसकाये

लेके बलाइयां मैया,
हिवडे से अपने मैया

नज़र कहीं लग जाए ना, लग जाए ना

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से,
मैया करा दै मेरो ब्याह,

उमर तेरी छोटी रे, नज़र तेरी खोटी रे
कैसे करायदऊँ तेरो ब्याह ।

राधिका गोरी से,
बृज की छोरी से
कान्हा करायदऊँ तेरो ब्याह ।

Sunday, March 16, 2008

यशोमति मैया से बोले नंदलाला...

मेरे सबसे पसंदीदा गीतों मैं से एक -

यशोमति
मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला
राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला

बोली मुस्काती मैया,
ललन को बताया,
कारी
अंधियारी आधी रात में तू आया
लाडला कन्हैया मेरा,
लाडला कन्हैया मेरा,
काली कमली वाला,
इसीलिए काला

यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यों गोरी, में क्यों काला,
राधा क्यों गोरी, में क्यों काला।

बोली मुस्काती मैया, सुन मेरे प्यारे,
बोली मुस्काती मैया, सुन मेरे प्यारे,
गोरी गोरी राधिका के, नैन कजरारे
काले नैनों वाली ने हो..
ऐसा जादू डाला,
इसीलिये काला

यशोमति मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला,
राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला

इतने में राधा प्यारी आयी इठलाती,
मैंने ना जादू डाला बोली बलखाती,
मैया कन्हैया तेरा हो
मैया कन्हैया तेरा जग से निराला
इसीलिए काला
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला

Monday, February 18, 2008

बाल कृष्ण की आरती

॥ श्री कृष्ण : ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ,
आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।

श्री यशुदा कौ परम दुलारो, बाबा की अँखियाँ कौ तारौ ,
गोपिन के प्राणन कौ प्यारौ, इन पै प्राण निछावर कीजे ।
आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।

बलदाऊ कौ छोटो भैया, कनुआ कह कह बोलत मैया ,
परम मुदित मन लेत बलिया, यह छवि नैनं में भर लीजे ।
आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।

श्री राधावर सुघर कन्हैया, बृज जन कौ नवनीत खिवैया ,
देखत ही मन लेत चुरैया, अपनौ सर्वस इन को दीजे ।
आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।

तोतर बोलत मधुर सुहावे, सखन मध्य खेलत सुख पावे ,
सोई सुकृति जो इनको ध्यावे , अब इनकू अपनौ कर लीजे ।

आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।
आरती बाल कृष्ण की कीजे, अपनौ जनम सफल कर लीजे ।